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Friday, December 19, 2014

ज्योतिषी की सलाह से चुदाई ( jyotish ki salah se chudai )

मेरा नाम मोनू है उम्र 18 साल और मैं लखनऊ में रहता हूँ।
इस कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने मेरी बड़ी बहन की चुदाई मेरे जिगरी दोस्त से करवाई।
मेरे दोस्त का नाम रिशु है और वह पहले मेरे पड़ोस में रहता था। हमारी दोस्ती बचपन की है। उसके घर पर उसके मम्मी पापा और वो खुद रहते है। हमारे घरेलू रिश्ते थे, मेरी दीदी उसको भी राखी बंधती थी और छोटा भाई समझती थी पर वो मेरी दीदी को चोदना चाहता था और मुझे उसकी मम्मी बहुत अच्छी लगती थी। हम समलैंगिक सम्बन्ध भी करते थे इसीलिए हम एक दूसरे से कुछ नहीं छुपाते थे।
उसके पापा का एक साल के लिए अचानक दिल्ली ट्रान्सफर हो जाने से अब वो और उसकी मम्मी ही वहाँ रहते है पर अब उन्होंने अपना घर मेरे घर से चार किलोमीटर की दूरी पर बनवा लिया है और कुछ दिन पहले वो वहाँ रहने चले गए हैं। मेरे घर पर भी मेरे मम्मी-पापा और मेरी बहन रश्मि रहते हैं। मेरे मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं और रश्मि कालेज में पढ़ती है। रश्मि की उम्र 19 साल है।
एक दिन मैं रिशु के घर गया तो उसकी माँ ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया।
मैंने उनसे पूछा- कामिनी आंटी, रिशु कहाँ है? कई दिनों से मिला ही नहीं और कालेज भी नहीं आ रहा है?
कामिनी- उसकी तो तबियत बहुत खराब है।
क्या हो गया आंटी? मैंने पूछा।
कामिनी- अब तुमसे क्या छिपाऊँ, जब से इस घर में आए हैं अचानक उसको दौरे पड़ने लगे हैं। वैसे तो एकदम ठीक रहता है पर अचानक चक्कर आ कर गिर पड़ता है।
तब तक रिशु भी आ गया। मैंने देखा तो दिखने से वो एकदम फिट लग रहा था।
मैंने उससे पूंछा कि आंटी क्या कह रही है? किसी डॉक्टर को दिखाया या नहीं?
रिशु- यार सभी बड़े डॉक्टरों को दिखा लिया, एक महीने से दवा खा रहा हूँ पर कुछ फर्क ही नहीं पड़ता है। अचानक चक्कर आ जाता है और एक से दो मिनट के लिए मैं बेहोश हो जाता हूँ। इसीलिए गाड़ी भी नहीं चला रहा और घर से बाहर भी नहीं जा रहा हूँ।
मैंने आंटी से कहा- आप मेरे साथ चलिए और रिशु की कुंडली ले लीजिए। मेरे एक गुरु जी है जो ज्योतिष के अच्छे जानकार है और कई लोगों की मदद कर चुके हैं। वो बता सकते हैं कि रिशु को क्या दिक्कत है।
आंटी भी साधू लोगों को बहुत मानती थी तो वो उसी समय मेरे साथ चल दी। रिशु को हमने घर पर ही छोड़ दिया कि कहीं रास्ते में तबियत न खराब हो जाये। गुरु जी के आश्रम पहुँच कर हमने अपने आने की खबर करवाई।
काफी भीड़ होने के बावजूद गुरु जी ने हमें पहले ही बुलवा लिया।
गुरु जी- आओ बेटा मोनू, सब कुशल मंगल तो है?
मैंने बताया- नहीं गुरु जी, ये मेरे दोस्त की माता जी हैं। अचानक मेरे दोस्त को दौरे पड़ने लगे हैं जिससे हम बहुत परेशान हैं।
गुरु जी- क्या नाम है बेटी तुम्हारे पुत्र का?
कामिनी- जी रिशु !
गुरु जी- अरे बहुत ही सुन्दर और गुणी बालक है, कई बार मोनू के घर पर उससे मुलाकात हो चुकी है मेरी।
कामिनी- जी कई डॉक्टरों को दिखाया पर कुछ नहीं हुआ, अब तो आपका की सहारा है।
गुरु जी- बेटी तुम पुत्र की जन्म कुंडली ली हो क्या?
कामिनी- जी महाराज, यह लीजिये !
यह कह कर कामिनी ने रिशु की कुंडली स्वामी जी को दे दी। करीब एक घंटे तक स्वामी जी ने उसको पढ़ा-देखा।
गुरु जी- बेटी, अब तक जीवन में मैंने ऐसा दोष नहीं देखा। इसका ठीक होना असंभव है।
यह सुन कर कामिनी आंटी जोर से रोने लगी और कहने लगी- नहीं महाराज, ऐसे मत कहिये, रिशु मेरा एक ही बेटा है, उसके लिए जो भी करना होगा वो मैं करूंगी पर आप मुझे निराश न करें।
गुरु जी- धीरज रखो बेटी !
कामिनी- नहीं महाराज, अब अगर मेरा बेटा ठीक नहीं हुआ तो मैं अपनी जान दे दूँगी।
गुरु जी- मोनू बेटा, तुम जरा बाहर जाओ, मुझे कामिनी से अकेले में कुछ बात करनी है।
मैं उठ कर बाहर आ गया और दरवाजे से कान लगा कर खड़ा हो गया।
अंदर गुरु जी आंटी से कह रहे थे- देखो बेटी, मैं वैसे तो यह उपाय बताने वाला नहीं था पर तुम्हारी हालत मुझे मजबूर कर रही है। पर यह उपाय भी आसान नहीं है और धर्म संगत भी नहीं है।
कामिनी- ऐसी क्या बात है स्वामी जी?
गुरु जी- बेटी, रिशु की कुंडली में एक भयानक दोष है जो सिर्फ एक हालत मैं ही हट सकता है। मुझसे तो कहा भी नहीं जा रहा।
कामिनी: बताइए स्वामी जी। जो भी उपाय होगा मैं करने के लिए तैयार हूँ।
गुरु जी- बेटी, रिशु एक ही दशा मैं ठीक हो सकता है। यदि वो एक ही सप्ताह के भीतर किसी अविवाहित कुंवारी ब्राह्मण कन्या से तीन बार सम्भोग करे।
यह सुन कर मुझे तो झटका लग गया और आंटी भी चौंक गई।
यह आप क्या कह रहे है गुरु जी? इस बात की संबावना तो बहुत कम है की कोई ब्राह्मण अपनी बेटी की शादी रिशु से करे जबकि हम ब्राह्मण नहीं हैं। कामिनी बोली।
गुरु जी- मैंने कहा है अविवाहित कन्या ! यह नहीं कहा कि उसका रिशु से विवाह हो, यदि विवाह हो गया तो वो कन्या भी कायस्थ हो जायेगी और यह उपाय विफल हो जायेगा। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि पहले सम्भोग के वक्त उसकी योनि अक्षत हो और कन्या के मासिकधर्म होते हों अर्थात आयु 16 वर्ष से अधिक हो और पूरे सप्ताह वो सिर्फ रिशु के साथ ही सम्भोग करे किसी और के साथ नहीं ! और कम से कम तीन बार सम्भोग करे ही।
इस उपाय के बाद रिशु चाहे तो उस कन्या से विवाह कर सकता है।
मुझे तो यह असंभव लगता है, भला कौन लड़की तैयार होगी इस तरह से ! और जो किसी लालच में तैयार हो जायेगी तो वो कुंवारी तो नहीं ही होगी। वैसे भी आज कल तो लड़कियाँ 13-14 की उम्र में ही अपना कुंवारापन खो देती हैं। कामिनी ने कहा।
गुरु जी ने कहा- जरूरी नहीं कि कन्या तैयार हो, बात सम्भोग की है प्रेम की नहीं। और मैंने कहा ही था कि उपाय कठिन है। पर इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है। और अगर रिशु इस बीमारी से निकल जाता है तो 80 वर्ष का आरोग्य जीवन होगा।
यह सुन कर कामिनी आंटी ने गुरु जी को प्रणाम किया और बाहर आ गई। हम वापस घर चल पड़े। इतनी देर में मैंने अपनी योजना बनाई और अनजान बनते हुए आंटी से पूछा- स्वामी जी ने क्या कहा और आप इतनी परेशान क्यों हैं?
तो कामिनी आंटी ने मुझसे कहा- बात तुम्हारे लायक नहीं है। अभी तुम छोटे हो।
मैंने कहा- आंटी आप मुझे नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं ! पर मैंने सब कुछ सुन लिया है।
कामिनी- जब तुमने सब कुछ अपने कानों से सुन लिया है तो मुझसे क्या पूछ रहे हो? स्वामी जी ने जो कहा है वो तो हो नहीं सकता।
मैंने कहा- आंटी, इतनी जल्दी हार नहीं मानिए, मैं काफी देर से यही सोच रहा था कि आपके घर जो काम वाली है वो तो ब्राह्मण है और उसकी बेटी अभी 16 साल की ही होगी। अगर उसको पाँच दस हजार रुपये दे दिए जायें तो वो शायद तैयार हो जाये?
कामिनी- अरे वो कुंवारी नहीं है, जब 15 साल की थी तभी एक लौंडे के साथ भाग गई थी। 4 महीने बाद लौट कर घर आई थी और मान लो कि अगर वो कुँवारी होती भी तो कौन सी माँ मान जायेगी। तुम भी तो ब्राह्मण हो, तुम्हीं कोई लड़की बताओ। अरे अगर कोई तुम्हें दस हजार रुपये दे तो क्या तुम अपने घर की लड़की किसी को दे दोगे?
मैंने कहा- आंटी, आप तो नाराज़ हो रही हैं ! रिशु को मैं अपने भाई से बढ़कर मानता हूँ और जरूरत पड़े तो रश्मि को भी इस काम के लिए दे सकता हूँ और वो भी बिना किसी पैसे के।
मेरी बात सुन कर कामिनी के तो होश ही उड़ गए, वो बोली- सच मोनू, अगर यह तुम सच कह रहे हो तो तुम रिशु को वाकई भाई मानते हो और रश्मि है तो 18 की पर इतनी सीधी है कि पक्का कुँवारी ही होगी। तुम अगर ऐसा कर दोगे तो मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी और रश्मि की शादी भी रिशु से कर दूँगी। पर रश्मि तैयार हो जायेगी?
मैंने कहा- देखिये स्वामी जी ने कहा था कि सम्भोग बिना कन्या की स्वीकृति से भी हो सकता है। और दूसरी बात मेरे घर वाले नहीं मानेगे कि उसकी शादी किसी गैर ब्राह्मण के यहाँ हो इसीलिए मुझे इस बात का वादा चाहिए कि यह बात बाहर नहीं जायेगी ताकि रश्मि की बदनामी न हो।
कामिनी- मैं जबान देती हूँ !
जबान से काम नहीं चलेगा, आज हमारे सम्बन्ध अच्छे है कल कौन जाने क्या हो जाये? आप कुछ नहीं कहेगी पर अगर मेरी रिशु से लड़ाई हो जाये और वो सबको बोल दे? मैंने कहा।
कामिनी- तो तुम क्या चाहते हो?
देखिए, मेरी सगी बहन की इज्जत का सवाल है तो दूसरी तरफ रिशु की भी किसी सगी रिश्तेदार का सवाल होना चाहिए।
कामिनी- देखो मोनू, अगर मेरे कोई बेटी होती तो मैं उसे तुम्हारे हवाले कर देती, पर मेरा एक ही बेटा है रिशु !
बेटी न सही माँ ही सही ! मैंने कहा।
मेरी बात सुन कर कामिनी चौंक गई। मैं कहा चौकिये मत आंटी जी, देखिये अगर रश्मि के साथ रिशु ने सम्भोग किया और आपने मेरे साथ तो ना मैं किसी से कहूँगा ना आप लोग। रिशु की बीमारी भी ठीक हो जायेगी और मेरी चिंता भी दूर हो जायेगी जो मुझे रश्मि की बदनामी को लेकर है। अरे, अब सोच क्या रही हैं, मैं अपने दोस्त के लिए अपनी सगी बहन की क़ुरबानी दे सकता हूँ और आप अपने इकलौते बेटे के लिए अपनी क़ुरबानी नहीं दे सकती?
कामिनी बोली- मैं यह नहीं सोच रही हूँ ! क्योंकि मेरे पास तैयार होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। बल्कि यह सोच रही हूँ कि तुम्हें एक 37 साल की औरत में इतनी दिलचस्पी क्यों है?
मैंने कहा- अरे आंटी, हीरे की कदर तो जौहरी ही जानता है। तो बताइए बात पक्की?
पक्की ! कामिनी बोली।
और मैंने प्यार से आंटी के एक होठों पर एक पप्पी ले ली।
उनके घर पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और बोला- आंटी आप रिशु को बाहर भेज दीजिए ताकि उसे भी मैं समझा दूँ।
कामिनी बोली- उसे यह भी बताओगे क्या कि रश्मि के बदले तुम मुझसे सम्भोग करोगे?
जितना जरूरी होगा उतना ही बताऊँगा, आप उसे बाहर तो भेजिए।
कामिनी अंदर गई और रिशु बाहर आ गया। उसे गाड़ी में बिठा कर हम वहाँ से चल दिए थोड़ी दूर जाकर मैंने गाड़ी एक तरफ़ रोकी और उसे गले लगा कर कहा- हमारी योजना कामयाब हो गई ! तुम्हारे चक्कर का चक्कर चल गया और तुम्हारी माँ मुझसे चुदने के लिए तैयार है और रश्मि की चुदाई तुमसे करवाने के लिए तो वो कुछ भी करेगी। स्वामी जी ने क्या एक्टिंग की है, मज़ा आ गया।
रिशु, अरे इतनी बढ़िया योजना बनाई थी, फ्लॉप कैसे होती? चलो घर चलो और आगे की तैयारी करते हैं।
रास्ते से हमने एक दवा खरीदी और घर पहुँच कर मैंने रिशु को इशारा किया और वो अंदर चला गया।
मैंने कामिनी से कहा- चलिए आंटी, रिशु को सब समझा दिया है, थोडा नाराज़ था पर मैंने उसे समझा दिया कि यह बहुत जरूरी है। चलिए बेडरूम में चल कर आगे की बात करते हैं।
कामिनी- हाय, तुमने रिशु को बता दिया कि तुम मेरे साथ क्या करोगे?
अब वो घर पर है और हम सेक्स करेंगे तो उसे पता नहीं चलेगा? मैंने कहा।
और कामिनी को बेडरूम में ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया।
कामिनी ने कहा- अभी यह करना जरूरी है? जब रिशु रश्मि से कर ले तब हम करेंगे।
मैंने कहा- अरे यार, रिशु तो कल रश्मि के साथ पहली बार करेगा। सुनो, तुम आज रात को मेरे घर फोन करना और रश्मि से कहना कि कल तुम्हारे यहाँ पूजा है और सारे लोग आ जायें। मम्मी पापा तीन दिन के लिए बाहर गए है तो रश्मि मेरे साथ यहाँ आएगी। तब तुम कह देना कि पंडित नहीं आया और पूजा रद्द हो गई। सबको फोन करके मना कर दिया पर हमारा फोन नहीं लग रहा था। फिर हम रश्मि को किसी न किसी तरीके उत्तेजित करके मना ही लेंगे और उसके बाद रिशु का काम हो जायेगा। कहो, मेरी जान ?
यह बोल कर मैंने कामिनी की साड़ी खोल दी और अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी।
कामिनी- इतनी जल्दी आंटी से जान और आप से तुम पर आ गए? मानती हूँ पक्के बहनचोद हो ! आओ और अब मेरी प्यास बुझाओ !
मुझे उम्मीद नहीं थी कि कामिनी इतनी जल्दी खुल जायेगी ! पर उसके मुँह से गालियाँ सुन कर मजा आ गया।
लम्बी, गोरी चिट्टी कामिनी का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक कूल्हे और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे। मेरे मन में उनको नंगा देखने का ख्याल आने लगा। फिर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। कामिनी एकदम मुझ से लिपट गई, मुझे करंट सा लगा जब उनके स्तन मेरी छाती से छुए। उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी। मैंने भी उसकी टांग पर एक पैर रख दिया और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- आओ मेरी जान !
कामिनी धीरे-धीरे मेरी बाहों में सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैंने उनके कूल्हों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
कामिनी को मजा आ रहा था। फ़िर कामिनी सीधी लेट गई। अब मैं भी उससे चिपट गया और उसके वक्ष पर सिर रख लिया। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। मैं धीरे धीरे उनका पेट और फ़िर जांघ सहलाने लगा।
तभी कामिनी ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है। अब उनके चुचूक साफ़ नज़र आ रहे थे। मैंने चूचियों पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा। मैंने उनकी चूचियाँ ब्लाउज से निकाल कर मुँह में ले लिया और दोनों हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से ऊपर करना शुरु कर दिया। उसकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मैं एकदम जोश में आ चुका था। उसकी चूत नशीली लग रही थी। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मैं पागल हो चुका था। आज मेरा बहुत पुराना सपना पूरा होने वाला था।
मैंने अपने पैर कामिनी के सिर की तरफ़ कर लिये थे। कामिनी भी मेरा लण्ड निकाल कर चूसने लगी। वह मुझे भरपूर मजा दे रही थी। कुछ देर बाद कामिनी मेरे ऊपर आ गई और मैं नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े कूल्हे सहलाने लगा। कामिनी की चूत पानी छोड़ गई।
अब मैं और नहीं रह सकता था, मैं उठा और कामिनी को लिटा कर, उसकी टांगें चौड़ी करके चूत में लण्ड डाल दिया और कामिनी कराहने लगी। मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा। कामिनी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और कहने लगी- मोनू ऐसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गई, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में चाहिये ! एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा।
कुछ देर बाद मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया और कामिनी भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी। उस दिन मैंने तीन बार अलग अलग आसनों से कामिनी को चोदा। कामिनी ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया।
उसके बाद हमने कपड़े पहने और बाहर ड्राइंगरूम में आ गए, रिशु वहाँ टीवी देख रहा था, उसको देख कर कामिनी थोड़ा शरमा गई और मैंने घर का नंबर मिलाया और फोन कामिनी को दे दिया। फोन रश्मि ने उठाया और वही बात हुई जो तय हुई थी। रश्मि ने कह दिया कि वो कल दस बजे तक आ जायेगी।
मैंने कामिनी को चूम लिया तो रिशु मुस्कुराने लगा और मैं वहां से चला आया।
घर पहुँचा तो रश्मि बोली- भैया, कामिनी आंटी का फोन आया था कल सुबह दस बजे उनके यहाँ जाना है, पूजा है।
मैंने कहा- ठीक है ! नौ बजे तक तैयार हो जाना !
और मन ही मन सोचा कि पूजा तो तुम्हारी होगी, कल की जिंदगी भर नहीं भूलोगी।
अगले दिन हम सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकले और दस बजे रिशु के घर पहुँच गए।
अंदर गए तो रश्मि ने पूछा- आंटी, क्या हम लोग सबसे पहले आ गए हैं?
कामिनी- अरे नहीं, असल में पूजा रद्द हो गई क्योंकि पंडित जी बीमार हो गए ! सबको तो मैंने फोन करके मना कर दिया पर तुम्हारा फोन लग ही नहीं रहा था। अच्छा ही हुआ कि तुम आ गई, पहली बार आई हो इस घर में ! मोनू तो आता रहता हैं पर तुम तो शक्ल ही नहीं दिखाती। अब खाना खाकर ही जाना।
रश्मि- नहीं आंटी, ऐसी बात नहीं है ! पर कॉलेज के बाद समय ही नहीं मिलता।
अरे ऐसी भी क्या पढ़ाई ! यही तो उम्र है खेलने खाने की ! क्यों मोनू?
मैंने शरारत से कहा- जी, मैं तो खूब खेलता-खाता हूँ आप तो जानती ही हैं। रिशु कहाँ है?
कामिनी- नहा रहा है !
तब तक रिशु नहा कर आ गया और उसने सिर्फ एक तौलिया लपेट रखा था। उसको देख कर रश्मि शरमा गई तो रिशु बोला- अरे क्या दीदी, बचपन में हम दोनों नंगे खेलते थे और अभी तो तौलिया पहना है मैंने ! तब भी शरमा गई?
रश्मि बोली- हट बदमाश !
रिशु रश्मि के सामने इस प्रकार से बैठ गया कि उसका लण्ड रश्मि को नजर आता रहे। रश्मि की निगाहें भी बार बार उसके तौलिए के अन्दर उसके लण्ड पर जा रही थी और यह बात हम तीनों से छिपी नहीं थी।
कामिनी ने मुझसे पूछा- मोनू कोल्डड्रिंक या चाय?
मैंने कहा- चाय !
रिशु ने भी चाय माँगी तब कामिनी ने रश्मि से पूछा तो वो बोली- जब ये लोग चाय पियेंगे तो मैं भी वही ले लूंगी।
पाँच मिनट में चाय आ गई और हमने अपने अपने कप उठा लिए।
तभी रिशु किसी बहाने से उठा और रश्मि के पास गया। रिशु ने रश्मि के ऊपर अपनी चाय गिरा दी, योजना के अनुसार रिशु की चाय ज्यादा गर्म नहीं थी। और वो पूरी चाय से तरबतर हो गई।
कामिनी को मैंने इशारा किया और वो रिशु के ऊपर चिल्लाने लगी।
रिशु ने तुरंत रश्मि का टॉप खींच कर उतार दिया तो रश्मि अकस्मात हुए इस घटनाक्रम से स्तम्भित सी रह गई। जब उसे अपना होश आया तो वो अपने को रिशु से छुड़ाने का प्रयत्न करने लगी। तब तक कामिनी उनके पास पहुँच चुकी थी और कामिनी ने रश्मि को रिशु से छुड़वा कर अपनी बाहों में ले लिया, उसे बाथरूम में ले गई और उसके ऊपर शॉवर चला दिया।
हम दोनों भी बाथरूम में गए तो देखा कि कामिनी भी बिल्कुल भीग चुकी थी। कामिनी रश्मि की ब्रा भी उतार चुकी थी और उसके स्तनों को धोने के बहाने मसल रही थी, उसके चुचूकों से खेल रही थी।
रश्मि की यौनाग्नि प्रज्वलित हो चुकी थी और उसके आंखें मुंदी जा रही थी।
रिशु अन्दर गया और वो भी रश्मि के स्तन मसलने लगा। रिशु ने रश्मि की चूचियों पर हाथ फ़ेरते हुए पूछा- अब जलन तो नहीं हो रही?
इस पर कामिनी बोली- हाँ रश्मि बता दे ! अगर जलन हो रही है तो रिशु से बर्फ़ मंगवाऊँ?
मैं बोला- मैं लाता हूं बर्फ़ !
मैं बर्फ़ रसोई में जाकर फ़्रिज़ से बर्फ़ ले आया और रिशु और कामिनी दोनों उसकी चूचियों पर बर्फ़ फ़िराने लगे।
रश्मि सिहर गई और कहने लगी- नहीं आन्टी ! बहुत ठण्डी लग रही है।
तो मैं गर्म कर देता हूं ना चूस कर ! कह कर रिशु कुछ ही पलों में उसके स्तन चूसने लगा।
अरे तेरी जीन्स बिल्कुल भीग गई ! कहते हुए कामिनी रश्मि की जींस का बटन खोलने लगी और नीचे झुक कर उसकी जींस उसकी टांगों से अलग कर दी।
अब रश्मि सिर्फ़ पैंटी में थी।
कामिनी ने रिशु को आँख से इशारा किया तो रिशु अपने हाथ रश्मि की पैन्टी पर ले गया और उसकी फ़ुद्दी पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा। रश्मि ने कोई विरोध नहीं किया।
रश्मि अब पूरी गर्म हो चुकी थी और सीत्कार रही थी। फिर रिशु उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा।
कामिनी ने अपने हाथ से रश्मि की पैंटी नीचे सरका दी और अब रिशु का हाथ उसकी नंगी योनि पर था।
इसी अवस्था में कामिनी और रिशु मिलकर रश्मि को कमरे में ले गए और बिस्तर पर लिटा दिया।
आँटी रिशु के गीले कपड़े उतारने लगी तो रिशु ने कहा- मम्मी, आप जाइए, मैं सम्भाल लूंगा।
कामिनी के जाने के बाद रिशु उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा, फ़िर रिशु रश्मि की चूत की फांकों पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते रिशु उंगलियों को रश्मि की चूत के फाँको में डाल कर रगड़ने लगा और अपनी एक उँगली रश्मि की चूत के अन्दर घुसा कर उसकी चूत को हल्के-हल्के रगड़ने लगा।
फिर उसकी चूत के जी-पॉयंट को अपनी उंगलियों से दबाने और हल्के-हल्के रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद रश्मि की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।
अचानक रश्मि के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और उसने अपनी आँखें खोल दी और काम-मद में बोली- रिशु क्या कर रहे हो?
रिशु ने कहा- बस सोचा कि आज अपनी रश्मि को कुछ मजा कराया जाये। सच बताओ, क्या मजा नहीं आ रहा हैं? मुझे पता है तुम मजे ले रही थी। वरना तुम्हारे नीचे से चिकना-चिकना सा नहीं निकलता।
रश्मि मुस्कुराई और बोली- सच रिशु, मुझे नहीं पता तुम क्या कर रहे थे पर मज़ा आ रहा था।
रिशु बोला- रश्मि, मेरा साथ दो। हम दोनों मिलकर खूब मजा करेंगे।
रश्मि बोली- क्या साथ दूँ और क्या दोनों मिलकर मजा करेंगे। और मेरी पैंटी क्यो उतार रखी है ?
रिशु ने कहा- रश्मि, मैं तुम्हारी पैंटी के अन्दर मजा ढूंढ रहा था !
कह कर रिशु ने उसे अपने सीने से चिपका लिया और फिर रिशु ने अपने जलते हुऐ होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए।
फिर रिशु उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रश्मि ने भी उसे अपनी बाँहो में कस लिया। वो बहुत गर्म हो चुकी थी, जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थी, रिशु के बालों पर हाथ फेर रही थी और उसके होंठ चूस रही थी।
रिशु का लण्ड रश्मि की जांघों से रगड़ खा रहा था। रिशु ने रश्मि का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। रश्मि ने बिना झिझके रिशु का लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। रिशु का लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। रश्मि लण्ड को मुठ्ठी में भर कर आगे-पीछे करने लगी। फिर वो रिशु का लण्ड पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगी।
अब रिशु रश्मि की चूत मारने को बेताब हो रहा था। रिशु रश्मि के ऊपर आकर लेट गया। रश्मि का नंगा जिस्म रिशु के नंगे जिस्म के नीचे दब गया। रिशु का लण्ड रश्मि की जांघों के बीच में रगड़ खा रहा था।
रिशु उसके उपर लेट कर उसके चुचूक को चूसने लगा। वो बस सिसकारियाँ ले रही थी। फिर रिशु एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हाथों से रिशु का लण्ड को टटोलने लगी। रिशु का लण्ड पूरे जोश में आ गया था और पूरा तरह खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था।
रश्मि रिशु के कान के पास फुसफसा कर बोली- ओह रिशु। प्लीज़ ! कुछ करो ना। तन-बदन में आग सी लग रही है।
यह सुन कर अब रिशु ने उसकी टांगें थोड़ी ओर चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया। फिर अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा। फिर रिशु ने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपारा रश्मि की कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया। लण्ड के अन्दर जाते ही रश्मि के मुँह से चीख निकल गई और वो अपने हाथ पाँव बैड पर पटकने लगी और रिशु को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन रिशु ने उसे कस कर पकड़ा था।
रश्मि की चीख सुन कर कामिनी अन्दर आ गई और सारा खेल देखने लगी।
रश्मि रिशु के सामने गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ रिशु, मुझे छोड़, रिशु मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है।
रिशु ने कहा- रश्मि तुम ही तो कह रही थी कि रिशु, प्लीज़ ! कुछ करो ना। तन-बदन में आग सी लग रही हैं। इसलिये तो तुम्हारे अन्दर डाला है। रश्मि तुम चिन्ता मत करो, पहली बार में ऐसा होता है, एक बार पूरा अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा।
रश्मि को देख कर कामिनी हंसने लगी और बोली- अरे पूरा डालो तब इसे असली मज़ा आयेगा।
यह सुन कर रिशु ने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया। रश्मि तड़पने लगी। रिशु उसके ऊपर लेट कर उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे रश्मि की तकलीफ़ कुछ कम हुई।
अब रिशु ने एक जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर कर दिया। रिशु का 8" लम्बा और ३" मोटा लण्ड उसके कौमार्य को चीरता हुआ उसकी कुँवारी चूत में समा गया।
इस पर वो चिल्लाने लगी- आहह्ह, मर गई। ओह प्लीज़ रिशु इसे बाहर निकाल, रिशु मर जाउंगी।
उसकी चूत से खून टपकने लगा था।
रिशु रुक गया और रश्मि से बोला- प्लीज़ ! रश्मि, मेरी जान, अब और दर्द नहीं होगा।
रश्मि का यह पहला सैक्सपीरियन्स था। इसलिए रिशु वहीं रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके माथे को और आँखों को चूमने लगा । उसकी आँखों से आँसू निकल आये थे और वो सिसकारियाँ भरने लगी थी। यह देख कर रिशु ने रश्मि को अपनी बाँहो में भर लिया।
फिर रिशु ने अपने जलते हुऐ होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए और रिशु उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा, ताकि वो अपना सारा दर्द भूल जाये। कुछ देर बाद उसका दर्द भी कम हो गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में से कस लिया। रिशु ने भी रश्मि को अपनी बाँहों में भर लिया। रिशु का पूरा लण्ड रश्मि की चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। फिर रिशु अपने होंठों से उसके नरम-नरम होंठों को चूसने लगा। कुछ देर तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे और एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे।
फिर रिशु अपने लण्ड को उसकी चूत में धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगा। रश्मि ने कोई विरोध नहीं किया। अब शायद उसका दर्द भी खत्म होने लगा था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर को भी हिलाने लगी थी। उसकी चूत में से खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और आज ही रिशु ने उसकी सील तोड़ी है।
उसकी चूत बहुत तंग थी और रिशु का लण्ड बहुत मोटा था, इसलिए रश्मि को चोदने में बहुत मजा आ रहा था। रिशु अपने लण्ड को धीरे-धीरे से रश्मि की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद रश्मि ने अपनी टांगें उपर की तरफ मोड़ ली और रिशु की कमर के दोनों तरफ लपेट ली। रिशु अपने लण्ड को लगातार धीरे-धीरे रश्मि की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे रिशु की रफ़्तार बढ़ने लगी। अब रिशु का लण्ड रश्मि की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। रिशु रश्मि की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मारने लगा था।
थोड़ी देर में रश्मि भी नीचे से अपनी कमर उचका कर रिशु के धक्कों का ज़वाब देने लगी और मज़े में बोलने लगी- सी .... सी.... और जोररर से.......... येस अररऽऽ बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और रिशु और अन्दर येस्स्स्स्सऽऽ जोर से करो। प्लीज़ ! रिशु तेज-तेज करो ना। आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।
रश्मि को सचमुच में मजा आने लगा था। वो जोर जोर से अपने कूल्हे हिला रही थी और रिशु तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। वो रिशु के हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने रिशु के कूल्हों को अपने हाथों में थाम लिया। जब रिशु लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने कूल्हे पीछे खींच लेती। जब रिशु लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी जांघें उपर उठा देती। रिशु तेज-तेज धक्के मार कर रश्मि को चोदने लगा। फिर रिशु बैड पर हाथ रख कर रश्मि के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब रिशु का लण्ड रश्मि की चिकनी चूत में आसानी और तेजी से आ-जा रहा था। रश्मि भी अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो मदहोश हो रही थी।
रिशु ने रुक कर रश्मि से पूछा- रश्मि अच्छा लग रहा है?
रश्मि बोली- हाँ रिशु बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज़ ! रुको मत। तेज-तेज करते रहो। हाँ प्लीज़ ! तेज-तेज करो। प्लीज़ ! चलो करो। अब रुको मत। तेज-तेज करते रहो।
रश्मि के मुहँ से यह सुन कर रिशु ने फिर से रश्मि को पूरे आवेग से चोदना शुरु कर दिया। रिशु ने रश्मि के बड़े-बड़े कूल्हे को अपने हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर रश्मि को चोदने लगा।
रश्मि के मुँह से मस्ती में "ओह्ह्हहोहोह सिस्स्सह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ ! रिशु तेज-तेज करो।"
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ने वाली थी तभी दोनों एक साथ अकड़ गये और एक साथ जोर-जोर से धक्के मारने लगे। फिर अचानक रश्मि ने रिशु को कस कर अपनी बाँहो में भर लिया और बोली- रिशु रिशु ! क्या हो रहा है मुझे ! जोर-जोर से करो येस-येस अररर् और जोर से य....य....यस यससस रिशु हई ईई....! इसके साथ ही रश्मि की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। उसने एक जोर से आह भरी और फिर वो ढीली पड़ गई।
रिशु समझ गया कि रश्मि स्खलित हो गई है। लेकिन रिशु का काम अभी नहीं हुआ था इसलिए रिशु जोर-जोर से अपने लण्ड से रश्मि की चूत को पेलने लगा। रिशु भी झड़ने वाला था, इसलिये रिशु तेज-तेज धक्के मारने लगा।
रश्मि रोने सी लगी और रिशु के लण्ड को अपनी चूत में से बाहर निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन रिशु ने उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा।
करीब 2-3 मिनट तक रश्मि को तेज-तेज चोदने के बाद जब रिशु होने लगा तो रिशु ने अपना लण्ड रश्मि की चूत से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के झांटों ऊपर वीर्य गिरा दिया और उसके ऊपर गिर गया। फिर रिशु उसके ऊपर लेट कर अपनी तेज-तेज चलती हुई सांसों को सामान्य होने का इन्तज़ार करता रहा। फिर रिशु रश्मि की बगल में लेट गया। रश्मि भी रिशु के साथ लेटी हुई अपनी सांसों को काबू में आने का इंतजार कर रही थी।
रश्मि की चूत के काले घने घुंघराले बालों में रिशु के वीर्य की सफेद बून्दें चमक रही थी।
कामिनी बोली- अरे रिशु तू पहली ही बार में इतनी देर टिका रहा? कमाल है।
मैंने कहा- अरे आखिर मेरी बहन की पहली चुदाई थी तो धमाकेदार तो होनी ही चाहिए थी।
कामिनी बोली- चलो अब अपन एक राउंड खेल लेते है।
फिर में कामिनी को चोद कर घर चला आया।
रात को मैंने फोन पर कामिनी से पूछा- रश्मि के क्या हाल हैं?
कामिनी ने बताया- उसको अब तो रिशु उसको तीसरी बार चोद रहा है और वो बहुत मज़े ले ले कर चुदवा रही है।
मैंने कहा- स्वामी जी ने तो एक हफ्ते का समय दिया था और रिशु ने तो एक दिन में ही तीन बार चोद डाला मेरी प्यारी दीदी को।
कामिनी हंसने लगी और बोली- अब रिशु की तबीयत ठीक हो जाये बस।
मैंने मन में कहा- ठीक तो हो ही जायेगा।
अगले दिन सुबह पापा का फोन आया, उन्होंने बोला कि वह चार दिन और वहीं रहेंगे।
फिर मैं आराम से तैयार हो कर जब रिशु के घर पंहुचा तो कामिनी ने बताया- रिशु और रश्मि एक साथ नहा रहे हैं।
मैंने रश्मि से कहा- घर नहीं चलना?
तो वो बोली- मम्मी-पापा तो परसों वापस आएंगे तब तक मैं यहीं रह जाती हूँ।
यह सुन कर रिशु ने रश्मि क एक प्यारा सा चुम्मा लिया और कामिनी बोली- यह तो बन गई पूरी चुदासी।
मैंने झूठ बोल दिया कि सुबह पापा का फोन आया था वो कल सुबह आ रहे हैं।
यह सुन कर रश्मि थोड़ा उदास हो गई तो मैंने कहा- अच्छा चलो ! शाम तक करो खूब प्यार ! आओ आंटी इनको प्यार करने दो ! हम आपके बेडरूम में चलते हैं।
और मैं फिर से कामिनी को एक बार और चोदने चल पड़ा और उधर रिशु रश्मि को बाथटब में लिटा कर चोदने लगा।
असल में मैंने सोचा कि जब रश्मि रिशु से चुद ही गई है तो क्यों न मैं भी उसको चोदूँ। यह सोच कर ही मैंने उसको झूठ बोला कि पापा कल आ रहे हैं ताकि उसे घर ले जा कर मैं खूब चोदूँ और उसकी गांड भी मारूँ।
शाम तक रिशु ने रश्मि की तबीयत से चुदाई की और फिर मैं उसे लेकर घर वापस आ गया।
अब मैं यह सोच रहा था कि कैसे रश्मि को चोदा जाये। क्योंकि हो सकता है कि रिशु से एक बार चुदने के बाद से वो उसके सामने खुल गई हो पर मेरे सामने आने से पहले वो अपना बदन ढक ले रही थी।
मैंने उसको बातों से गर्म करने की सोची। मैंने उससे पूछा- कैसा लगा पहली बार सेक्स करके?
वो बोली- देखो भैया, सभी लड़कियों को शरीर की भूख होती है और सबको सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है पर एक तो बदनामी का डर और कभी कोई अनुभव न होने से कोई भी लड़की शादी से पहले सेक्स करने से डरती हैं, मैं भी शादी से पहले यह काम नहीं करना चाहती थी। जब मैं चुदी तो लगा कि जन्नत में पहुँच गई और लगा कि मैं बेकार ही डरती थी और फिर तो लगा कि बस रिशु मुझे चोदता ही जाये।
मैंने कहा- बस रिशु ही या और किसी से भी चुदने का इरादा है?
वो बोली- बात तो वही बदनामी की है और मेरा काम तो अब रिशु से हो ही जायेगा क्योंकि उसने बोला है कि जब भी जरूरत हो बुला लेना, मैं चोदने आ जाऊँगा।
मैंने कहा- बदनामी का कोई डर न हो तो?
वो बोली- मतलब?
मैंने कहा- रश्मि जब से मैंने कल से तुम्हें नंगा देखा है, मेरा बुरा हाल है और जब तक तुम मुझे नहीं मिल जाती मुझे चैन नहीं आयेगा।
अचानक रश्मि भड़क गई और बोली- अपनी सगी बहन को पहले तो अपने दोस्त से चुदवाया और अब खुद भी चोदना चाहता है? बहन चोद !
उसके मुँह से गाली सुन कर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि हम सबको लगता था कि यह बहुत शरीफ है और कुछ नहीं जानती।
मैं साफ़ साफ़ बोला- देखो, तुम्हारी अगर मर्ज़ी न हो तो कोई बात नहीं ! पर मम्मी पापा कल नहीं चार दिन बाद आएंगे और मैं तुम्हें झूठ बोल कर वापिस इसलिए लाया था कि तुम्हें चोद सकूँ।
वो चिल्लाने लगी- चोद सकूँ ! चोद सकूँ ! अरे हाथ भी मत लगाना वरना देख लेना भोसड़ी के ! अरे, मैं वहाँ आराम से रिशु से चुद रही थी तब तो झूठ बोल कर मुझे वापिस ले आया और खुद चोदना चाहता है? गांड मार दूँगी अगर हाथ भी लगाया तो।
मैंने सोचा कि इस वक्त काम टेढ़ी ऊँगली से निकलना होगा।
मैंने कहा- बस इतनी सी बात? अभी मैं रिशु को यहीं ले आता हूँ !
और मैं रिशु को लेने चल पड़ा।
रिशु के घर पहुँच कर मैंने कामिनी से कहा- आज रात को रिशु मेरे घर पर ही रुकेगा और उसको लेकर वापस आ गया।
रास्ते में रिशु बोला- यार मोनू, रश्मि बहुत मस्त चीज़ है ! मैं उससे शादी करना चाहता हूँ ! अभी मम्मी से मैं यही बात कर रहा था। कुछ चक्कर चलाओ और मेरे साले बन जाओ।
मुझे पता था कि रश्मि रिशु के लंड की दीवानी हो चुकी है पर मैं बोला- यार, इसमें मेरा क्या फायदा? तुम्हें तो करारा माल मिलेगा जिंदगी भर चोदने के लिए और मुझे कुछ नहीं।
वो बोला- यार मम्मी को चुदवा दिया तुमसे ! और क्या चाहते हो?
मैं बोला- मैंने भी तो रश्मि चुदवा दिया तुमसे ! हिसाब बराबर।
रिशु- ऐसा मत बोल, तू मेरा दोस्त है। कुछ कर न यार।
मैं- देख कर तो सकता हूँ पर तू कुछ ऐसा कर कि रश्मि मुझसे चुदवा ले बस एक बार।
रिशु- साले अपनी सगी बहन को चोदेगा? मैं उससे शादी करना चाहता हूँ और तू बोल रहा है कि उसको तुझसे चुदवाऊँ।
मैं- अबे जाने दे, सबसे बड़ा रिश्ता तो आदमी और औरत का होता है। बोल क्योंकि मेरे मनाये बिना मम्मी पापा नहीं मानेंगे।
रिशु- चल यार, तू आखिर दोस्त है, आज ही ग्रुप सेक्स करते है रश्मि के साथ। चल एक बोतल वोदका ले ले।
मैं- हाँ खाना भी तो लेना है।
रिशु के कहने से मैंने सिर्फ नानवेज खाना लिया। खाना और वोदका खरीद कर हम जैसे ही घर पहुँचे, रश्मि रिशु से लिपट गई और पैंट के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर हिलाने लगी।
मैंने कहा- अरे पहले खाने-पीने का इंतज़ाम करो, इसके लिए तो पूरी रात पड़ी है।
रश्मि बोली- लाओ, पैकेट मुझे दे दो ! मैं खाना लगाती हूँ।
खाना देख कर रश्मि बोली- अरे तुम लोग सिर्फ नानवेज ले कर आये हो ? अब मैं क्या करूंगी।
रिशु बोला- मेरी जान, पहले सिर्फ कबाब और तीन गिलास ले कर आओ।
रश्मि कबाब और गिलास ले कर आई तो रिशु ने कहा- ये सब मेज पर रख दो और मेरी गोद में बैठ जाओ। मोनू तुम पेग बनाओ।
रश्मि रिशु की गोद में बैठ गई और रिशु उसकी चूचियों से खेलने लगा।
मैंने तीन मोटे पेग बना दिए और रिशु ने एक पेग उठा कर रश्मि के मुँह से लगा दिया।
रश्मि बोली- अरे, मैं नहीं पीती !
पर रिशु ने एक ना सुनी और पूरा गिलास जबरदस्ती रश्मि के गले में उड़ेल दिया।
रिशु ने कहा- एक और पेग बनाओ इसके लिए।
इस बार मैंने वोदका थोड़ा कम और कोल्ड ड्रिंक ज्यादा डाल कर पेग बनाया तो रश्मि धीरे धीरे पीने लगी। तब तक रिशु ने एक कबाब का टुकड़ा उठाया और उसके मुँह में डालने लगा।
रश्मि ने कहा- नहीं रिशु, मैंने तुम्हारे कहने से शराब पी ली है पर यह नहीं खा सकती, उलटी हो जायेगी।
रिशु बोला- मेरी जान एक बार चखो तो !
रश्मि ना ना करती रही और रिशु ने सिर्फ एक सिर्फ एक मेरे लिए करते करते उसके मुँह में कबाब डाल ही दिया। बोनलेस होने की वजह से रश्मि को कुछ पता ही नहीं चला और वो कबाब खा गई। जैसा हमने सोचा था, हमने रश्मि को चार पेग पिला दिए और खुद सिर्फ दो ही पेग पिए और रश्मि का पहला पेग तो तीन पेग के बराबर था। अब रश्मि नशे में धुत हो चुकी थी और मज़े ले लेकर तंदूरी चिकन फाड़ रही थी।
खा पीकर हम रश्मि को गोद में उठा कर बेडरूम में ले गए। तब तक तो नशे से बेहोश हो चुकी थी।
रिशु बोला- इतनी पी ली है इसने कि कल सुबह तक नशा नहीं उतरेगा इसका ! आधा घंटा सोने दे इसे, तब तक कोई ब्लू फिल्म लगा दे।
आधे घंटे में हम दोनों के लण्ड कुतुबमिनार बन चुके थे। हमने तब जा कर रश्मि को जगाया। मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया पर उस पर नशा बहुत था तो उसने कोई विरोध नहीं किया और फ़िर वहीं सोफ़े पर रश्मि के बिल्कुल सामने बैठ गया। रिशु ने रश्मि को अपने ऊपर खींच लिया और रश्मि को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये।
रश्मि अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। रश्मि की छाती रिशु के सीने पे दबी हुई थी। रिशु अब रश्मि को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और रश्मि अब उसके नीचे हो गई। वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी।
रिशु 2-3 मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाईं चूची को हल्के से मसल भी रहा था। रश्मि की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी।
जल्द ही रश्मि अपने पैरों को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी। जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, रिशु उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया। मैं अब रश्मि की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया।
रिशु अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी। उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी। रिशु अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और रश्मि के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी।
रिशु चूसता रहा और रश्मि चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है।
जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई। 

Thursday, December 18, 2014

Bhabhi ki chut me bada loda ( hindi sexy story )

Mein delhi mein MBA karne ke liye wahna jakar mein apne cosin bhai k ghar jakar permanetly ruknna jo ki ab nahi rahe wanha sirf bhabhi rahti bhaiya.Shadi ke 3 saal baad hi ek road excident mein bhaiya ka swargwas ho gaya tha. Main bhabhi ke saath akela hi rahta tha. Bhabhi ka naam Ritu hai. Bhabhi bahut hi khoobsurat thi. Wo mujhe Sunny kah kar hi bulati thi. Unke Papa aur mummy ka swargwas bahut pahle hi ho chuka tha. Bhabhi umar mein mujhse 5 saal ki badi thi. Wo mujhe bahut pyar karti thi. Bhaiya ke gujar jane ke baad main bhabhi ki poori dekhbhal karta tha aur wo bhi mera bahut khayal rakhti thi. Main subah 10 baje hi ghar se chala jata tha aur phir raat ke 6 baje hi ghar wapas aata tha. Ek din meri tabiyat kharab ho gayi to main jaldi collagese dopahar ke 1 baje hi ghar wapas aa gaya. Bhabhi ne puchha, kya hua Sunny. Maine kaha, mera saara badan dukh raha hai aur lag raha hai ki kuchh fever bhi hai. Meri baat sunkar wo pareshan ho gayi. Unhone mujhse kaha, tum mere saath doctor ke paas chalo. Maine kaha, maine medical store se kuchh medicine le li hai. Mujhe thoda aaram kar lene do. Wo boli, theek hai, tum aaram karo. Main tumhare badan par tel laga kar malish kar deti hoon. Maine kaha, nahin, rahne do, main aise hi theek hoon. Wo boli, chup chap apne kamre mein ja kar let jao. Main abhi tel le kar aati hoon. Main kabhi bhi bhabhi ki baat se inkar nahin karta tha.

Main apne kamre mein aa gaya. Maine apni shirt aur pant utar di aur kewal baniyan aur nekar pahane huye hi let gaya. Main ek dam dheela tha aur thoda chhota nekar hi pahanta tha. Bhabhi tel le kar aayi. Unhone mere sir par tel lagaya aur mera sir dabane lagi. Uske baad unhone mere haath, seene aur peeth par bhi tel laga kar malish kiya. Aakhir mein wo mere pair par tel laga kar malish karne lagi. Aakhir main bhi aadmi hi tha. Unke haath lagane se mujhe josh aane laga. Josh ke mare mera lund khada hone laga aur mera nekar tent ki tarah se upar uthne laga. Dheere dheere mera lund poori tarah se khada ho gaya aur mera nekar ek dam tent ki tarah ho gaya. Main janta tha ki nekar ke chhota hone ki wajah se bhabhi ko mera lund thoda sa dikhayi de raha hoga. Wo mere pairon ki malish karte huye mere lund ko dekh rahi thi aur unki aankhein thoda gulabi si hone lagi thi. Unke chehre par halki si muskan bhi thi. Malish karne ke baad wo chali gayi. Uske baad main so gaya.Sham ke 6 baje meri neend khuli aur main uth gaya. Bhabhi chaye lekar aayi. Maine chaye pi. Uske baad main bathroom chala gaya. Bathroom se jab main wapas aaya to bhabhi ne kaha, ab let jao, main tumhare badan ki phir se malish kar deti hoon. Maine kaha, ab rahne do na, bhabhi. Wo boli, kya malish karne se kuchh aaram nahin mila. Maine kaha, bahut aaram mila hai. Wo boli, phir kyon mana kar rahe ho. Maine kaha, teek hai, tum kewal mere pair ki hi malish kar do. Wo khush ho gayi. Unhone mere pair ki malish shuru kar di. Mera lund phir se khada ho gaya. Is baar mera nekar thoda pichhe ki taraf khisak gaya tha jis se bhabhi ko mera lund is baar kuchh jyada hi dikhayi de raha tha. Bhabhi mere lund ko dekhte huye mere pairon ki malish karti rahi.

Thodi der baad wo boli, main jab tere pair ki malish karti hoon to tujhe kya ho jata hai. Main kaha, kuchh bhi to nahin hua hai mujhe. Unhone mere lund par halki si chapat lagate huye kaha, phir ye kya hai. Maine kaha, jab tum malish karti ho to mujhe gudgudi si hone lagti hai, isi liye to main mana kar raha tha. Unhone mere lund par phir se chapat lagate huye kaha, ise kabu mein rakha kar. Maine kaha, jab Tum malish karti ho to ye mere kabu mein nahin rahta. Wo boli, tum bhi apne bhaiya ki tarah hi ho. Main jab unke pair ki malish karti thi to wo bhi ise kabu mein nahin rakh pate the. Maine mazak karte huye kaha, phir wo kya karte the. Wo boli, badmash kahin ka. Maine kaha, batao na bhabhi, phir wo kya karte the. Bhabhi sharmate huye boli, wahi jo sabhi mard apni biwi ke saath karte hain. Maine kaha, tab to tumhein bhaiya ke pairon ki malish nahin karni chahiye thi. Unhone puchha, kyon. Maine kaha, aakhir baad mein pareshani bhi tumhein hi uthani padti thi. Wo boli, pareshani kis baat ki, aakhir mera man bhi to karta tha. Maine kaha, mera bhi kabu mein nahin hai, ab tum hi batao ki main kya karoon. Wo boli, shadi kar le. Maine kaha, main abhi shadi nahin karna chahta. Unhone muskurate huye kaha, phir bathroom mein ja kar muth mar le. Maine anjan bante huye puchha, wo kya hota hai. Wo boli, kya sach mein tujhe nahin maloom hai ki muth marna kise kahte hain. Maine kaha, nahin. Unhone mere lund ki taraf ishara karte huye kaha, ise apne haath mein pakad kar apna haath teji se aage pichhe karna. Thodi hi der mein iska juice nikal jayega aur ye shant ho jayega. Maine kaha, tum mujhe thoda sa kar ke bata do.

Josh mein aa hi chuki thi. Wo boli, tu bahut hi badmash hai. Ise bahar nikal, main bata deti hoon ki kaise karna hai. Maine kaha, tum khud hi ise bahar nikal kar batao ki kaise karna hai. Unhone sharmate huye mere lund ko pakad kar nekar se bahar nikal liya. Jaise hi mera 8" lamba lund bahar aaya to wo boli, baap re, tera to bahut hi bada hai aur mota bhi. Maine puchha, achchha nahin hai kya. Wo sharmate huye boli, bahut hi achchha hai. Maine puchha, bhaiya ka kaisa tha. Wo boli, unka bhi achchha tha lekin tere jaisa lamba aur mota nahin tha. Maine kaha, ab batao ki kaise karna hai. Unhone mere lund ko pakad kar apna haath aage pichhe karna shuru kar diya. Mujhe bahut maza aane laga. Wo bhi josh mein aane lagi. 2 min muth marne ke baad wo boli, aise hi kar lena. Ab ja bathroom mein. Maine kaha, bathroom mein kyon, agar main yahin kar leta hoon to ismein kya burayi hai. Wo boli, tera juice yahan girega aur mujhe hi saaf karna padega. Maine kaha, main hi saaf kar doonga. Wo boli, theek hai, yahin kar le. Main jati hoon. Maine unka haath pakad kar kaha, tum yahin baitho na. Wo boli, tere lund par haath lagane se mujhe pahle hi thoda sa josh aa chuka hai. Agar main tujhe muth marte huye dekhungi to mujhe aur jyada josh aa jayega. Phir mere liye bardast karna mushkil ho jayega. Aakhir main bhi to aurat hoon aur abhi jawan bhi. Maine kaha, mujh par bharosa rakho, main tumhare saath kuchh bhi nahin karunga. Wo boli, mujhe poora bharosa hai tabhi to maine tere lund ko pakad kar tujhe muth marna bataya hai. Maine puchha, nekar utar doon ya aise hi muth mar loon. Wo boli, kya nekar bhi kharab karega. Utar de ise.

Apna nekar utar diya aur muth marne laga. Bhabhi mujhe muth marte huye dekhti rahi. Main bhabhi ko dekhta hua muth mar raha tha. Dheere dheere wo aur jyada josh mein aa gayi. Josh ke mare mere muh se aah... Ooh... Ki aawaz nikal rahi thi. Wo mujhe aur kabhi mere lund ko dekh rahi thi. Unhone apna ek haath apni chut par rakh liya aur sahlane lagi. Maine puchha, kya hua. Wo boli, tu mujhe ek dam pagal kar dega. Main ja rahi hoon. Maine unka haath pakad liya aur kaha, batho na mere paas. Wo chup chap baith gayi. Main muth marta raha. Bhabhi josh ke mare pagal si ho chuki thi. Thodi hi der mein unhone mera lund pakad liya aur boli, ab rahne de, ab mujhse bardast nahin ho raha hai. Maine puchha, kya hua. Unhone apna petticoat upar kar diya aur boli, dekh meri chut bhi ek dam geeli ho gayi. Tune to mujhe pagal sa kar diya hai. Ab mujhe bardast nahin ho raha hai, tu meri chut ko shala de, main tera Lund sahla deti hoon. Maine kaha, kewal sahlana hi hai ya kuchh aur karna hai. Wo boli, agar tera man kare to meri chut ko thoda sa chat le jis se mujhe bhi thoda aaram mil jayega. Maine kaha, kapde to utar do. Wo boli, tu khud hi utar de. Maine bhabhi ke kapde utar diye. Ab wo ek dam nang ho gayi. Unki chut ek dam saaf thi. Maine kaha, tumhari chut to ek dam saaf hai. Wo boli, mujhe chut par baal bilkul bhi pasand nahin hain isi liye main ise hamesha hi saaf rakhti hoon. Tera bhi to ek dam saaf hai. Maine kaha, mujhe bhi baal pasand nahin hain. Wo let gayi to maine unki chut par apni jeebh phirani shuru kar di. Wo boli, aise nahin. Maine kaha, phir kaise. Wo boli, mujhe bhi to tera choosna hai. Tu mere upar ulta let ja aur apna lund mere muh ke paas kar de phir chat meri chut ko. Habhi ke upar 69 ki position mein let gaya. Maine unki chut par jeebh phirana shuru kiya to unhone mere lund ka supada apne muh mein le liya aur choosne lagi. Mujhe khoob maza aane laga. Bhabhi bhi josh ke mare siskariyan bharne lagi. Maine unki clit ko apne hothon se dabana shuru kar diya to unhone jor ki siskari li. Maine puchha, kya hua. Wo boli, bahut maza aa raha hai, aur jor jor se daba. Maine unki clit ko aur jyada jor se dabana shuru kar diya to unhone mera lund apne muh mein aur jyada andar le liya aur teji ke saath choosne lagi. Maine ek ungli unki chut mein dal di aur andar bahar karne laga. Thodi hi der mein bhabhi ki chut se juice nikal aaya. Wo boli, chat le ise. Maine unki chut ka saara juice chat liya. Thodi hi der mein mere lund ka juice bhi nikalne laga to bhabhi saara ka saara juice nigal gayi. Uske baad main hat gaya aur unke bagal mein let gaya.

Bhabhi mera lund sahlane lagi. Thodi der baad wo boli, aaj to wo ho gaya jo ki nahin hona chahiye tha. Maine kaha, maine aisa kya kar diya. Wo boli, tune mujhe apna lund dikha kar aaj mujhe pagal sa kar diya. Maine kaha, maine to nahin dikhaya tha. Wo boli, tera nekar hi itna chhota aur dheela tha ki mujhe tera lund dikhayi de gaya. Main apne aap ko kabu mein nahin rakh payi isi liye maine tujhse pair ki dobara malish karne ke liya kaha tha. Main tera lund dekhna chahti thi kyon ki mujhe tera lund bahut hi lamba aur mota dikh raha tha. Maine kaha, ab to dekh liya na. Wo boli, haan, dekh bhi liya aur pasand bhi kar liya. Maine kaha, ab kya irada hai. Wo boli, tu bhi wahi kar jo tere bhaiya mere saath karte the. Maine kaha, ye theek nahin hai. Wo boli, kya theek hai kya nahin, main kuchh nahin janti. Agar tu mere saath nahin karega to main mar jaungi. Maine puchha, main tumhare saath kya karoon. Wo boli, jo tere bhaiya mere saath karte the. Maine kaha, maine to kabhi dekha hi nahin ki bhaiya tumhare saath kya karte the. Bhabhi ne mere galon ko jor se kat liya aur boli, ab chod de mujhe. Maine kaha, dard hoga. Wo boli, to main kya karoon, hone de. Jo hoga dekha jayega. Maine kaha, tum meri bhabhi ho, main tumhein kaise chod sakta hoon. Bhabhi ka to josh ke mare bura haal tha. Wo boli, tu mujhe nahin chodega lekin main to tujhe chod sakti hoon. Maine kaha, phir tum hi chodo.

Und phir se khada ho chuka tha. Bhabhi mere upar aa gayi. Unhone mere lund ke supade ko apni chut ke beech rakha aur dabane lagi. Unke chehre par dard ki jhalak saaf dikh rahi thi phir bhi wo ruki nahin. Mera lund dheere dheere unki chut mein ghusta hi ja raha tha. Unki chut bahut hi tight thi. Unhone dabana jari rakha to thodi hi der mein unki aankhon mein aansoo bhi aa agye. Maine puchha, kya hua. Wo boli, dard bahut ho raha hai. Maine kaha, phir ruk jao na, kyon itna dard bardast kar rahi ho. Wo boli, main pagal ho gayi hoon. Ab tak mera lund bhabhi ki chut mein 6" tak ghus chuka tha. Dard ke mare bhabhi ka bura haal ho raha tha. Tabhi wo apne badan ka saara jor dete huye achanak mere lund par baith gayi. Mera poora ka poora lund unki chut mein sama gaya. Unke muh se jor ki cheekh nikli. Unka saara badan thar thar kanpne laga. Unke chehre par pasina aa gaya. Unki sansein bahut tej chal Rahi thi. Wo mere upar let gayi aur mere hothon ko choomne lagi. Main unki kamar aur chutad ko sahlane laga. Tabhi mujhe badmashi soojhi. Maine unki gaand ke chhed par apni ungli phirani shuru kar di to unhein maza aane laga. Achanak maine apni ungli unki gaand mein dal di to unhone jor ki siskari li aur boli, badmash kahin ka. Pahle to kah raha tha ki tum meri bhabhi ho, main tumhein kaise chod sakta hoon. Ab meri gaand mein ungli dal raha hai. Kya main ab teri bhabhi nahin rah gayi. Maine kaha, bilkul nahin, ab to tumne mera lund tumne apni chut mein dal liya hai. Ab tum meri bhabhi nahin rah gayi ho. Wo boli, phir main ab teri kya lagti hoon. Maine kaha, biwi. Wo boli, phir chod de na apni biwi ko. Kyon tarsa raha hai mujhe. Ab to maine tera poora ka poora lund apni chut ke andar le liya hai. Meri ungli abhi bhi bhabhi ki gaand mein thi. Maine phir shararat ki aur kaha, main tumhein ek hi shart par chod sakta hoon. Wo boli, kaisi shart. Maine kaha, main tumhari gaand bhi marunga. Wo boli, apni biwi se bhi puchhna padta hai kya. Maine kaha, mujhe nahin maloom. Wo boli, tere bhaiya ne to mujhse kabhi nahin puchha, jab bhi unka man kiya unhone meri chudayi ki aur jab unka man hua to unhone meri gaand bhi mari. Maine kaha, iska matlab tum bhaiya se gaand bhi marwa chuki ho. Wo boli, to kya hua, maza to dono mein hi aata hai. Ab mujhe jyada mat parshan kar, chod de na. Maine kaha, thoda sa tum chodo phir thoda sa main chodunga. Wo boli, theek hai, baba.

Ne dheere dheere dhakke lagane shuru kar diye to unke muh se cheekh nikalne lagi. Maine puchha, ab kya hua. Wo boli, dard ho raha hai. Maine puchha, kyon, ab to poora andar le chuki ho. Wo boli, andar lene se kya hota hai. Meri chut abhi tere lund ke size ki thode hi huyi hai. Maine puchha, mere lund ki size ki kaise hogi. Wo boli, jab tu mujhe kayi baar chod dega tab. Wo dheere dheere dhakke lagati rahi. Maine puchha, tumhari chut ko chauda karne ke liye mujhe kitni baar chodna padega. Wo boli, ye to tere upar hai ki tu kis tarah se meri chudayi karta hai. Maine puchha, kya ek baar mein bhi ho sakta hai. Wo boli, bilkul ho sakta hai, agar tu mujhe pahli baar mein hi kam se kam 1 ghante chod sake to. Lekin main janti hoon ki tu aisa nahin kar payega. Maine puchha, kyon. Wo boli, tune kabhi kisi ko pahle choda hai. Maine kaha, nahin. Wo boli, to phir tu 10 min se jyada rukega hi nahin. Maine kaha, rukunga kyon nahin. Wo boli, tujhe meri chudayi kerne mein josh jyada aa jayega is liye.

Bhabhi ko dhakke lagate huye lagbhag 10 min ho chuke the aur wo is dauran 1 baar jhad bhi chuki thi. Tabhi mere lund ka juice nikal pada aur saath hi saath wo bhi phir se jhad gayi. Wo muskurate huye boli, kya hua pahalwan. Maine kaha, wahi hua jo tum kah rahi thi. Wo boli, meri chut dheeli karne ke liye tujhe kam se kam 1 ghante tak meri chudayi karni padegi. Main ye bhi janti hoon ki agli baar tu jyada se jyada 15 min hi mujhe chod payega. Is tarah jab tu 3-4 baar meri chuday kar dega tab kul milakar 1 ghante ho jayenge aur meri chut dheeli ho jayegi aur tere lund ke size ki ho jayegi, samjah gaye bachchu. Maine kaha, bilkul samajh gaya, madam.

Ne mere lund ko apni chut ke andar hi rakha aur mere upar let gayi. Wo mere hothon ko choomti rahi aur main unki chuchiyon ko masalta raha. 10 min ke baad mera lund unki chut mein hi phir se khada hone laga to wo boli, ab tum mujhe chodo. Maine kaha, jaisi aap ki marzi. Wo muskurate huye mere upar se hat gayi aur let gayi. Main unke upar aa gaya.
Maine unki chudayi shuru kar di. Main poore josh mein tha aur jor jor ke dhakke lagate huye unko chod raha tha. Wo boli, sabhash bahadur, bahut hi achchhi tarah se chod rahe ho, chodte raho, rukna mat, thoda aur jor ke dhakke lagao. Maine aur jyada teji ke saath dhakke lagane shuru kar diye. Lagbhag 15 min ki chudayi ke baad main jhad gaya. Bhabhi bhi is chudayi ke dauran 2 baar jhad chuki thi.

Maine unhein saari raat khoob jam kar choda. Wo bhi poori tarah se mast ho gayi thi aur main bhi. Subah tak main unhein 6 baar chod chuka tha. Subah ko maine puchha, tumhari chut mere lund ki size ki ho gayi ya nahin. Wo boli, jab tumne meri 4 baar chudayi kar di phir uske baad main chillayi kya. Maine kaha, bilkul nahin. Wo boli, phir samajh lo ki meri chut tumhare lund ki size ki ho gayi.

Wednesday, November 19, 2014

BAHEN KI MAJBURI ME CHUDAI

Hello friends mera nam Sanjay Jha h ma Bihar ka rehne vala hu lekin bachpan se Delhi me rehta hu mere papa ek government job krte h and mummy ek kapde ko factory me kam karti h ..meri ek bhn Bh h Jo 18 saal ki h and vo dikhne me kafi sundar h jiski vaje se muje uska bht khyal rakhna padta kyunki bhart jaise desh me sundar pada hona ke paap h uska nam Sonam h..

Meri Bhn government school me padyo h and abhi 10 class me h ma 12 clas me hu..abh ma ata hu kahani pe ye kahani aj se 2 mahine pehle ki …

At 11:30pm

(Tring-tring)
Mummy-Sanjay dekh to kiska phone h
Me-hello
Doctor-hello kya ap Sudhir Jha ke bête h
Me-ha ap kon
Doctor-ma government hospital se bolra hu ap jldi se tha a jaye
Me-par doctor huya kya h ap kuch to btao

Doctor-ap yha a jayo jitna jaldi Ho sake
Mere to hosh udh Gaye ke kahi papa ko kuch Ho na gya Ho unke bina hum kya karege Maine mummy ko btya to vo rone lagi
Mummy-beta doctor kya Bol rahe the sab thk to h na jldi bta
Vo pagl si Ho gayi phr Sonam bh ghbra gayi Maine jldi se scooter nikla and mummy ko uspe bathake le gya…jaise him hospital pouche ek badi musibat humara itezar kari thi …papa ka accident Ho gya tha and unki halat thk nh thi ..Ma doctor ke pas gya

Me-doctor sir papa ko kya Ho gya ye sb kaise huya btayi
Doctor-dekhiye humare pas 10:15 ke kareeb cal ayi thi ke ek admi road pe pada huya h and uske sir(head) par(leg) se kho on behra h Hume abhi ye nh pata ke ye sb kaise huya kyunki APKE pitaji abhi hosh me nh h
Me-to abh kya karna h doctor
Doctor-ap ine bachna chathe h to kisi private hospital me le jao tha inka bachna mushkil h
Mummy pagl Ho gayi and rone lagi
Me-par doctor Vha to bht paise dene padege
Doctor-abh paise bachalo ya jaan

Mummy-beta chl apne papa ko le chl yha se
Ma ghr ka bada tha and mere pe abh sari responsibility thi Maine mummy ki and doctor ki bt mani and pitaji ko ek private hospital me le gya..unone pitaji ka ilaj kar diya and 5 din bs hum sb unse mil paye to Vha ke doctor me btya ke Inki back bone and leg me fracture h and jldi se inka acha treatment nh huya to inka leg katna pas skta h ye sunke mere hosh ud gaye..ghr me paise nh the Maine mummy se bt kari to vo boli ke vo apne sone ka Sara saman bech chuki h abh kuch nh h ma bht tension me a gya and rat ko so nh paya …phr mere dimag me ek Asa idea h Jo humari zindagi bacha bh dalta h and barbad bh

Next morning
Me-ma abh kya Kare kaise bachaye papa ko
Mummy-beta muje nh pta
Me-ek idea h par vada karo ke ap muje Maroge nh na datoge
Mummy-bta idea
Me-mera ek dost h Jo call girls ko ek rat ke liye set krta h and une kisi ke ghr bhj ke paise kamata h and ladki ko bh deta h

Mummy-beshram mar jayungi par ye km nh karungi
Me-mummy ma bh kuch nh kr skta tha to ap Apni ijat bachalo ya papa ki jaan
Ye bat sunke mummy tension me a gayi and sham ko mere pas ayi
Mummy-beta sun agr hum vo call girl vala kam krte h to ise kisi ko pta to nh chalega na ma tyar hu kyunki agar tere pitaji nh rahe to mere jine ka bh kya fayda par beta kisi ko nh pta chlna chaiye

Me-mummy ap Sonam ko to mnayo
Mummy-beta nh kabhi nh vo ye sb nh uski ye padne ki uMaR h nh beta ye glt h
Me-mummy vo bht sundar h uske sath some ke liye log bht paise dege
Mummy-tu kaise bt Kara h vo Teri bhn h
Me-abh dekhlo ma apne dost ko phone krke bulayu kya btayo?

Mummy-kl subhe bula liyo
Me-thke
Next Morning
Me-mummy mera dost ane vala h ready raho
Mummy-beta vo kuch paise deke to jayega na
Me-ha mummy agr ap kuch nh karoge to paise bh milege

Meri ma thi to gori but figure me vo bt nh thi bal bh lambe the unke chuche bh thk the or gand todi bhr Nikli thi kareeb 11:30 vaje mera dost aya
Vo 6 foot lamba ek dum gora and th hi smart and good health vala bnda tha uska nam Varun tha
Ting-tong
Me-are Bhai tu a gya Aja bath Bhai
Varun-Bhai paani dede jadli
Me-mummy pani leke ayo
Mummy-ye lo beta paani
Varun-ha vo ladki kha h jiski tu bt Kara tha

Me-Bhai dekh Hume paise ki jarurt h tu kuch krde meri mummy hi vo ladki h
Varun-Abe tune muje pagl bnya tune bola bht mast ldki h asi ladkiyon ko to koi free me nh chodta aj kl ke logo ko JaWaN ladkiyan chaiye
Ye sunke mummy rone lagi and Varun ke par me pad gayi and bolne lagi ‘beta hum pade likhe nh h Hume paise chaiye humari mdad kardo tum Jo bologe ma vo karungi.
Varun-dekho Hume JaWaN ladki chaiye ap me vo bt nh h
Mummy-ap bh dekho meri beti sirf 15 saal ki h vo ye sb kaise karegi
Usi waqt ghanti Bajti h ma gate khilne gya to Sonam ghr a chuki thi. Use dekhte hi Varin ke muhh me paani a gya vo use ghurne laga itne me Sonam boli
Sonam-ma ap ro kyu rahi Ho and ye bahiya kon

Mummy-beta kuch nh tum jao kapde change karlo ma ati hu
Jaise hi Sonam andar gayi Varun bola
Varun-kitne paise chaiye tere pitaji ke ilaj ke liye
Mummy-beta bs 1,50,000
Varun-thke ma kar dunga 1 mahine me itne ma tumhare pitaji ko apne dost ke hospital me shift krva deta hu Vha unka ilaj free me chlta rahega
Ye sunke ma Varun ke par ko chumne lagi itne me Varun bola age to suno

Mummy-bolo beta
Varun-Sonam ko mere havale karna hoga 1 mahine ke liye ye sunke phir se ma rone lagi.
Varun-abh ijat bachalo ya Apni zindagi
Or Varun chla gya rat ko 11:30 vaje mummy mere Kare me ayi
Mummy-beta tu soya to nh na

Me-nh ma neend kha ati h abh ye btao kya karna h
Mummy-karna kya h Sonam ko mnao ye sb ke liye
Me-ye sunke ma pagl Ho gya and bola thankyou mummy abh papa Bach jayege
Mummy-par Sonam ko kaise mnaye
Me-emotional blackmail
Mummy-vo kaise

Me-bas abh ma jo bolu vo karna
Us Tym neelam pad rahi thi to Maine ek plan bnaya ma uske room ke bhr jake mummy se bt krne laga ke papa ke liye paise kha se laye and ma or mummy asi bate karne lage jise Sonam rone lagi and bhr ake boli
Sonam-mummy Hume kuch to karna hoga
Mummy-beta ek km Ho skta h

Sonam-kya
Mummy-Sanjay bato use
Maine use sab btya kuch der ke liye kamosi cha gayi phr Sonam Neeche muhh krke boli ma tyar hu

Next morning
Maine Sanjay ko phone Kara and vo a gya Sonam us Tym apne room me pdai kari thi Varun ne bola ke vo 10000 dega bas Sonam ko bolna Jo ma bolu Kare ma bola tum use humare samne karne ko bolo vo man jayegi vo bola thke phr mummy uske kamre me gayi and use leke ayi.Sonam bht Dari Huyi thi and Varun ki shakl se havaniyat jhalak rahi thi .
Varun-hello Sonam
Sonam-hello
Varun-tume pta h na ma kon hu and tum yha kyu ho

Sonam-ha muje pta h
Varun-to aunty ji ap piche Ho jaye jara and Sonam ko apna kam karne dijiye Sonam mere pas aao

Sonam Varun ke pas gayi to Varun ne use gale se laga liya and uski gaand k maslne laga ye dekh mera kadha Ho gya and mummy uda as Ho gayi and but mummy ja nh skti thi nh to Sonam rone lagti phr Varun ne Sonam ko Kiss karna Shru Kara vo to jaise meri Bhn ke hoto ko choos ke laal kr diya phr usne Sonam ko niche bthya and apna lund nikla ye dekh Sonam kadi hoke ma ke pas chali gayi and rone lagi phr mummy ne Sonam ko piche krke kudh niche bath gayi and Varun ke lund ko pkd ke choose lagi ye dekh muje bura to laga but maja bh aya phr ma sofe pe bath gya and apna lund bh nikl liya phr Varun bola

Varun-Ek km kr Tera Chota h tu pehle Apni Bhn ko chusva and maje le itne ma teri ma ko chodta hu

Ma Sonam ke pas gya and uske boobs dbane laga or use niche batha diya or uske hot pe lund rakh diya pehle to usne muhh udar kr liya phr toda mnane pe usne muhh khola and choose lagi phr Maine uske baal khole dusri side Varun mummy ka suit nikl diya and vo bra/panty me Varun ka choos rahi thi jab Maine Sonam ke kapne niklne ki koshish kari to vo MNa karne lagi ye dekh ke Varun ko gussa a gya and vo bola

Varun- Bahen ke lode ma tuje paise de chuka phr bh ye Sonam kuch nh kari ya to Bol ke puri nangi Ho and mera lund choos ya tu paise vapis de and apne baap ko Marne de.Ye sunke ma dar gya and Maine Sonam ke Dono hath pkad liye and mummy me uske par and Maine uska suit phad diya vo rone lagi phr Varun aya or uske chote se boobs ko maslne laga vo to rahi thi phr usne Sonam ki bra-panty nikali kya Jannat thi dosto uski choot pe tode bht baal the or boobs chote se the or pink niple phr Varun bola ke ise bed pe le jao ma ata hu .Phr Varun 5 min bad oil leke aya and Sonam ko choot pe lgya or chut pe lund rkh ke ghusa diya Sonam chilane lagi rone lagi par Varun use chodta raha and vo roti rahi and ma muthi Marta raha and abh mera jhadne vala tha Varun bola todi der ruk sath jhad leke phr usne Sonam ko ghodi bnya

Muje Apni Bhn pe taras ara tha uski gand ka ched(hole) bht Chota tha jaise hi varun ne ghusya to Sonam buri trh rone lagi par Maine uske pkd liye and par mummy ne and Varun use chodta raha kareeb 10 min bad Varun bola ready h ma bola kya vo bola jaldi Apni Bhn ka muhh khol mummy ne sonal ka muhh khola and Varun ne jhaad diya phr Maine bh jhaad diya Sonam ki halat buri thi .

Wednesday, November 12, 2014

शादीशुदा चचेरी बहन - Hindi sex story

मैं गर्मी की छुट्टियों में मुम्बई गया था। मुम्बई में मेरी चाची रहती हैं। वह वहाँ पर चेम्बुर में रहती हैं। मैं जब मुम्बई गया था तब चाची के पास मेरी चचेरी बहन भी आई हुई थी। उसका नाम रीना है। उसकी शादी हो चुकी है। उसकी उम्र चौबीस वर्ष की है। वो दिखने में बहुत ही सेक्सी है। उसके कपड़े पहनने के ढंग और रहन-सहन भी बहुत सेक्सी हैं। उसे कोई भी देखे तो उसका लण्ड खड़ा होना ही होना है।
एक दिन चाची को गाँव जाना पड़ा। वह गाँव चली गई। घर पर मैं और रीना दीदी दोनों ही थे। उस दिन शाम को मैं बोर हो गया था, इसलिए मैंने दीदी से कहा,"क्यों ना फिल्म देखने चलते हैं।" वह भी राजी हो गई, और हम फिल्म देखने चले गए। उस दिन हमने मर्डर फिल्म देखी। फिल्म में काफी गरम दृश्य थे। फिल्म देखने के बाद हम घर आए। हमने रात का खाना खाया। रात काफ़ी हो चुकी थी।
आपको तो पता ही होगा, मुम्बई में घर बहुत छोटे होते हैं। उस पर मेरी चाची एक कमरे के घर में रहती हैं। वहाँ सिर्फ एक ही बिस्तर के बाद, थोड़ी और जगह बचती थी। अब हमें सोना था। सो मैंने अपनी लुँगी ली और दीदी के सामने ही अपने कपड़े बदलने लगा। मैंने मेरी शर्ट खोली, बाद में पैन्ट भी। मेरे सामने अब भी मर्डर फिल्म के दृश्य घूम रहे थे, इसलिए मेरे लंड खड़ा था। वो अण्डरवियर में तम्बू बना रहा था। मेरे पैन्ट निकालने के बाद मेरे लण्ड की तरफ़ दीदी की नज़र गई, वह यह देखकर मुस्कुराई। मैंने नीचे देखा तो मेरे अण्डरवियर में बहुत बड़ा टेन्ट बना हुआ था। मैं शरमाया और मैंने मेरा मुँह दूसरी ओर घुमा लिया, फिर लुँगी बाँध ली।
पर लुँगी के बावज़ूद मेरे लंड का आकार नज़र आ रहा था। उस हालत में मैं कुछ भी नहीं कर सकता था। फिर मैंने यह भी सोचा कि दीदी यह सब देखकर मुस्कुरा रही है, उसे शर्म नहीं आ रही है, तो फिर मैं क्यों शरमाऊँ?
मैं बिस्तर पर जाकर सो गया। फिर दीदी ने आलमारी से अपनी नाईटी निकाली और कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया, उसने साड़ी उतारी। वाऊ... क्या बद़न था। वह देखकर तो मैं पागल ही हो गया और मेरा लंड उछाल मारने लगा। उसने अपनी ब्लाऊज़ निकाली और बाद में अपनी पेटीकोट भी निकाल दी। वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी। उसे उस हालत में देखकर तो मैं पागल ही हो रहा था। लेकिन वह मेरी दीदी थी, इसलिए नियंत्रण कर रहा था। मुझे डर भी लग रहा था कि मैं कुछ कर ना बैठूँ और दीदी को गुस्सा आ गया तो मेरी तो शामत आ जाएगी। उसने नाईटी पहन ली। उसकी नाईटी पारदर्शी थी, जिसमें से उसका सारा जिस्म नज़र आ रहा था।
वह मेरे पास आकर सो गई। हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोए थे। लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे सामने उसका नंगा जिस्म घूम रहा था। और उसके मेरे पास सोने के कारण मेरा तनाव और बढ़ा हुआ था। लेकिन कुछ करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
आधे घंटे तक तो मैं वैसे ही तड़पता रहा। लेकिन बाद में मैंने सोचा कि ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आने वाला। अगर तूने कुछ नहीं किया तो हाथ से निकल जाएगा। मैंने सोच लिया थोड़ा रिस्क लेने में क्या हर्ज़ है। और मैं थोड़ा सा दीदी की ओर सरक गया। दीदी मेरी विपरीत दिशा में मुँह करके सोई थी। मैंने मेरा हाथ उनके बदन पर डाला। मेरा हाथ दीदी के पेट पर था। मैंने धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके पेट पर घुमाना चालू किया। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उनकी चूचियों पर रखा। उसकी चूचियाँ काफ़ी बड़ी और नरम थीं। मैंने उसकी चूचियाँ धीरे-धीरे दबानी चालू कीं। उसने कुछ भी नहीं कहा, ना ही कोई हरक़त की। मेरी हिम्मत काफ़ी बढ़ गई। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ पर दबाया और उसे अपनी ओर खींचा और फिर धीरे-धीरे मैं अपना लंड उसके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार में दबाने लगा। वह मेरी ओर घूम गई। मेरी तो डर के मारे गाँड ही फट गई।
लेकिन वह भी मेरी ओर सरकी, तो मेरा लंड उसकी चूत पर दब रहा था और उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर। मैं समझ गया कि वह सो नहीं रही थी, बस सोने का नाटक कर रही थी और वह भी चुदवाना चाहती है। अब तो मेरे जोश की कोई सीमा ही नहीं थी। मैंने उसे मेरी ओर फिर से खींचा, तो वह मुझसे थोड़ा दूर सरक गई। मैं डर गया, और चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा।
थोड़ी ही देर बाद उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और मसलने लगी। मैं बहुत खुश हुआ। उसने अपने हाथों से मेरी लुंगी निकाल दी और अण्डरवियर भी, और मेरे लंड को मसलने लगी। फिर उसने मेरे कान में कहा,"वीजू, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। तुम्हारे जीजू का तो बहुत छोटा है।"
मैंने भी दीदी की नाईटी निकाल दी और उनको पूरा नंगा कर दिया। फिर मैं उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगा। मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था। वह सिसकियाँ भर रही थी। मैं उसे चूमते-चूमते उसकी चूत तक चला गया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए। उसके मुँह से सीत्कार निकल गई। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डालनी शुरु की, वह अपने चूतड़ उठाकर मुझे प्रतिक्रिया दे रही थी।
मेरा लंड अब लोहे जैसा गरम हो गया था। मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और मैंने लंड उसके मुँह में डाल दिया। वह भी मेरा लंड बड़े मज़े से चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने बाद में अपना लण्ड उसकी दोनों चूचियों के बीच में डाला और उसे आगे-पीछे करने लगा। वाऊ... क्या चूचियाँ थीं उसकी, मैं तो पागल हुआ जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसने कहा,"वीजू, प्लीज़, अब रहा नहीं जाता, लंड मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोदो।" मैं उसके ऊपर फिर से लेट गया और मैंने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर उसकी चूत के ऊपर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
मैंने दीदी से पूछा,"दीदी, तुम तो कह रही थी कि जीजू का लण्ड मेरे लण्ड से काफी छोटा है, तो तुम्हारी चूत इतनी ढीली? एक ही झटके में आधा लण्ड अन्दर चला गया।"
इस पर वह मुस्कुराई और बोली,"अरे वीजू, तुम्हारे जीजू का लण्ड छोटा तो है, पर मेरी चूत ने अब तक बहुत से लण्ड का पानी चखा है।"
फिर मैंने दूसरा झटका दिया और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। फिर मैंने उसकी चुदाई शुरु कर दी। वह भी अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी. उसके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं। वह कह रही थी,"वीजू... चोदोओओओ... और ज़ोर से चोदोओओओओ... अपनी दीदी की चूत आज फाआआआड़ डालो... ओह.. वीजू... डालो और ज़ोर से और अन्दर डालो..... बहुत मज़ा आ रहा है।"
उसकी ये बातें सुनकर मेरा जोश और भी बढ़ जाता और मेरी रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी। फिर मैं झड़ गया और वैसे ही उसके बदन पर सो गया और उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा। उस रात मैंने दीदी की ख़ूब चुदाई की।